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Showing posts from September, 2020

मेरे सरकार आये है mere sarkar aaye hai saja do ghar ko gulshan saa

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 सजा दो घर को गुलशन सा, मेरे सरकार आये है, लगे कुटियाँ भी दुल्हन सी, मेरे सरकार आये है.. पखारो इनके चरणों को बहा कर प्रेम की गंगा, बिषा दो अपनी पलको को मेरे सरकार आये है, सरकार आ गए है मेरे गरीब खाने में, आया दिल को सकून उनके करीब आने में, मुदत से प्यासी आखियो को मिला आज वो सागर, भटका था जिसको पाने की खातिर इस ज़माने में, उमड़ आई मेरी आंखे देख कर अपने बाबा को, हुई रोशन मेरी गलियां मेरे सरकार आये है, सजा दो घर को गुलशन सा, तुम आकर भी नहीं जाना मेरी इस सुनी दुनिया से, कहु हर दम यही सबसे मेरे सरकार आये है, सजा दो घर को गुलशन सा, श्रेणी कृष्ण भजन

नमामीशमीशान निर्वाण रूपं namami shamishan nirvan roopam

 नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम्‌ । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम्‌ ॥ निराकार मोंकार मूलं तुरीयं, गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम्‌ । करालं महाकाल कालं कृपालुं, गुणागार संसार पारं नतोऽहम्‌ ॥ तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम्‌ । स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारू गंगा, लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥ चलत्कुण्डलं शुभ्र नेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्‌ । मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं, प्रिय शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥ प्रचण्डं प्रकष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम्‌ । त्रयशूल निर्मूलनं शूल पाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम्‌ ॥ कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सच्चिनान्द दाता पुरारी। चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥ न यावद् उमानाथ पादारविन्दं, भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्‌ । न तावद् सुखं शांति सन्ताप नाशं, प्रसीद प्रभो सर्वं भूताधि वासं ॥ न जानामि योगं जपं नैव पूजा, न तोऽहम्‌ सदा सर्वदा शम्भू तुभ्यम्‌ । जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभोपाहि आपन्नामामीश शम्भो ॥ रूद्राष्टकं इद...

झुला झुलाऊ कान्हा तुझे झुला झुलाऊ jhula jhulaau kanha tujhe jhula jhulaau

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 झुला झुलाऊ कान्हा तुझे झुला झुलाऊ, आ गोद में लाला तुझे लोरी मैं सुनाऊ झुला झुलाऊ कान्हा तुझे झुला झुलाऊ, लेकर के मेरे लाल को जाते को कहा स्वामी, जी भर के इसे देख लू और दूध पिलाऊ झुला झुलाऊ कान्हा तुझे झुला झुलाऊ, बेबश हुई माता तेरी भाई के जुलम से वैरी हुआ मामा तेरा तुझे कैसे वचाऊ, झुला झुलाऊ कान्हा तुझे झुला झुलाऊ, रो रो के कहे देवकी मुझे छोड़ के न जा लग जाए न तुझको नजर आँचल में छुपाऊ, झुला झुलाऊ कान्हा तुझे झुला झुलाऊ, मोहन को रखा सूप पे वासुदेव चले है रोते है मोहन चीख के बंधन से छुडाऊ झुला झुलाऊ कान्हा तुझे झुला झुलाऊ, लाला की जुदाई को सहे कैसे तेरी माँ कान्हा की जुदाई को सहे कैसे वैरागी, फटता है कलेजा मेरा दुःख कैसे बताऊ झुला झुलाऊ कान्हा तुझे झुला झुलाऊ, श्रेणी कृष्ण भजन