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Showing posts from August, 2020

यशोदा तेरा लाला नटखट बड़ा है yashoda tera lala natkhat bada hai

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 यशोदा तेरा लाला नटखट बड़ा है तोड़ा इसने मेरा पानी का घड़ा है पनघट पे जाऊं तो यह मिल जाए तिरछे तिरछे नैनो से मुझको रिझाए जाने ना देवे रस्ते में खड़ा है उचक उचक के कंकरिया मारे मटकी जो फूटी तो ताली बजावे सौगंध दी तो हमसे लड़ा है भोर हुई जब जमुना गई थी सांझ ढले पर घर पहुंची थी ऐसे नटखट से पाला पड़ा है संग सहेली ताने मोहे मारे क्यों गई अकेली कह के चिड़ावे कैसे बताऊं मेरे दिल में बसा है यशोदा तेरा लाला नटखट बड़ा है  श्रेणी कृष्ण भजन

देख दरबार तेरा मैं दीवाना हुआ dekh darbar tera main dewana huya

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 देख दरबार तेरा मैं दीवाना हुआ देख शिंगार तेरा श्याम दीवाना हुआ ये तेरी सांवरी सूरत ने कैसा कर दिया जादू पाके दीदार तेरा मैं दीवाना हुआ देख दरबार तेरा मैं दीवाना हुआ मुझको लुभाए तेरी हर इक अदा, जब जब मैं देखू दिल हो तुझपे फ़िदा ना मुझको होश है ना ही रहा मेरे दिल पे काभू मैं तो हर बार तेरा श्याम दीवाना हुआ देख दरबार तेरा मैं दीवाना हुआ तीर चलाये तेरी तिर्शी नजर घ्याल हुआ मेरा दिल और जिगर नजर आता है तू ही तू मुझे तो याहा मैं देखू पाके मैं प्यार तेरा श्याम दीवाना हुआ मैं तो हर बार तेरा श्याम दीवाना हुआ देख दरबार तेरा मैं दीवाना हुआ मेरे जैसे कई दीवाने याहा आये है तुझको रिजाने याहा, काहा से दिल चुराने का ये गुण सीखा बता दे तू सोनू संसार तेरा श्याम दीवाना हुआ मैं तो हर बार तेरा श्याम दीवाना हुआ देख दरबार तेरा मैं दीवाना हुआ श्रेणी कृष्ण भजन

पावन किशोरी जी paavan kishori ji

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 पावन किशोरी जी, तुम्हरे चरन ll, श्री चरनन में, दे दो शरण  ll जिन चरनो में रहे, नंद नंदन , मस्तक धरो मेरे, करूँ मैं वन्दन ll अति सुखदाई, तारण तरण ll, श्री चरनन में, दे दो शरण  ll चरन शरण बिन, मरना भी भारी, हारा हूँ कर्मो से, तरना भी भारी ll   भटकन मेरी अब, कर लो हरण ll, श्री चरनन में, दे दो शरण ll ब्रज रज़ माही, दे दो ठिकाना, ब्रज में रज़ बन, रहूँ बरसाना ll करूँ रसिकन पग, धूलि धरण ll, श्री चरनन में, दे दो शरण  ll तुम्हरे चरण, त्रिलोकी समाए, गोपाली को, पागल बनाए  ll तन मन धन, चरनन अर्पण ll, श्री चरनन में, दे दो शरण  ll अपलोडर - अनिलरामूर्तीभोपाल श्रेणी कृष्ण भजन

आया मैं तेरे द्वार पे दुनिया से हार के aaya main tere dwar pe duniya se haar ke

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 आया मैं तेरे द्वार पे दुनिया से हार के, मर्जी तेरी तू थाम ले चाहे विसार दे गैरो की छोड़ो जो कभी मेरे करीब थे, हसने लगे है आज वो भी मेरे नसीब पे, रोने भी न दिया मुझे अपनों ने मार के आया मैं तेरे द्वार पे दुनिया से हार के, रेहमत की तेरी दासता सुन कर जहान में, फर्यादी बन के आ गया मैं तेरे समाने, लाखो को तूने तारा मुझको भी तार दे, आया मैं तेरे द्वार पे दुनिया से हार के, तेरा ही दर है आखिरी ये श्याम जान ले सोनू की दुभती हुई कश्ती को थाम ले, वर्ना ये प्राण जायेगे तेरे ही द्वार पे आया मैं तेरे द्वार पे दुनिया से हार के, श्रेणी कृष्ण भजन